India Invited to Join Trump-Led Gaza Peace Board

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस में भारत को शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है। यह जानकारी भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने पुष्टि करते हुए दी। यह पहल गाज़ा में जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार की गई अमेरिका समर्थित व्यापक युद्धविराम योजना के दूसरे चरण का हिस्सा है।

इस कदम को वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक संकटों से जूझ रही है।

राजदूत सर्जियो गोर का बयान

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाज़ा में स्थायी शांति लाने के उद्देश्य से गठित बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का राष्ट्रपति ट्रंप का निमंत्रण पहुंचाना मेरे लिए सम्मान की बात है। यह बोर्ड प्रभावी प्रशासन, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने में मदद करेगा।”

उन्होंने इस पोस्ट के साथ प्रधानमंत्री मोदी को भेजे गए आधिकारिक निमंत्रण पत्र की प्रति भी साझा की।

गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा

डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस के गठन की घोषणा की थी। इसे इज़राइल-हमास युद्ध को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका की रणनीति का एक महत्वपूर्ण चरण बताया गया है। यह बोर्ड अक्टूबर 10 से लागू हुए युद्धविराम के बाद शुरू हो रहे जटिल दूसरे चरण की निगरानी करेगा।

किन देशों को मिला है निमंत्रण

भारत के अलावा, समाचार एजेंसी एपी के अनुसार कम से कम चार अन्य देशों ने भी पुष्टि की है कि उन्हें इस बोर्ड में शामिल होने का अमेरिकी निमंत्रण मिला है।
इन देशों में शामिल हैं:

  • जॉर्डन
  • ग्रीस
  • साइप्रस
  • पाकिस्तान

इससे पहले कनाडा, तुर्की, मिस्र, पराग्वे, अर्जेंटीना और अल्बानिया भी इस सूची में शामिल हो चुके हैं। हालांकि, कुल कितने देशों को आमंत्रण भेजा गया है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

स्थायी सदस्यता की शर्तें

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ट्रंप के नेतृत्व वाले इस बोर्ड में स्थायी सदस्यता पाने के लिए देशों को 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। वहीं, तीन साल की अस्थायी सदस्यता के लिए किसी तरह की वित्तीय प्रतिबद्धता आवश्यक नहीं होगी।

इस योजना के तहत जुटाई गई धनराशि का उपयोग गाज़ा के पुनर्निर्माण और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में किया जाएगा।

बोर्ड की संभावित जिम्मेदारियाँ

गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम के बाद क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत:

  • गाज़ा में एक नई फ़िलिस्तीनी तकनीकी समिति की स्थापना
  • अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती
  • हमास का निरस्त्रीकरण
  • युद्ध से तबाह गाज़ा का पुनर्निर्माण

शामिल हैं।

निमंत्रण पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका समर्थित 20-सूत्रीय गाज़ा युद्धविराम योजना को मंजूरी दी है, जिसमें इस बोर्ड के गठन का प्रावधान है।

कार्यकारी समिति का गठन

व्हाइट हाउस ने बोर्ड के दृष्टिकोण को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति के गठन की भी घोषणा की है। इसमें शामिल हैं:

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
  • ट्रंप के मध्य-पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ
  • जारेड कुशनर
  • ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
  • विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा
  • इज़राइली उद्योगपति याकिर गाबे

इसके अलावा, कतर, मिस्र और तुर्की के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया गया है, जो युद्धविराम की निगरानी कर रहे हैं।

इज़राइल की आपत्ति

हालांकि, इस पहल पर इज़राइल ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि यह समिति इज़राइल से समन्वय किए बिना बनाई गई है और उसकी नीतियों के खिलाफ है। इसे अमेरिका और इज़राइल के बीच दुर्लभ सार्वजनिक मतभेद के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ

इस बोर्ड की तुलना संयुक्त राष्ट्र से की जा रही है और कुछ देशों को आशंका है कि यह वैश्विक संस्था के अधिकारों को कमजोर कर सकता है। यूरोपीय देशों के राजनयिकों ने चेतावनी दी है कि बोर्ड का प्रस्तावित चार्टर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल खड़ा कर सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 60 देशों को यह निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, अधिकांश सरकारों ने सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। हंगरी ऐसा पहला देश रहा जिसने इस प्रस्ताव को बिना किसी शर्त स्वीकार किया।

बोर्ड का भविष्य और विस्तार

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित चार्टर में यह उल्लेख है कि डोनाल्ड ट्रंप आजीवन इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। शुरुआत में बोर्ड का फोकस केवल गाज़ा पर रहेगा, लेकिन भविष्य में इसके कार्यक्षेत्र को वैश्विक स्तर पर विस्तारित करने की योजना है।